भाषा किसे कहते है? परिभाषा, प्रकार व उपभाषा में अंतर

मनुष्य को अपनी बात किसी अन्य तक पहुंचाने के लिए भाषा का उपयोग करता है तो आपके मन में भी कभी सवाल आया होगा कि आखिर “भाषा किसे कहते हैं और भाषा कितने प्रकार की होती है? व उपभाषा या बोली क्या है?” अगर हां तो आज इस आर्टिकल में हम भाषा के बारे में जानकारी प्राप्त करने वाले है।

भाषा किसे कहते है?

मानव जाति के विकास के शुद्ध इतिहास में सर्वाधिक महत्व संप्रेषण के माध्यम का रहा है और वह माध्यम है -भाषा। मनुष्य समाज की इकाई होता है तथा मनुष्य से ही समाज बनता है।

भाषा किसे कहते है?
भाषा किसे कहते है

समाज की इकाई होने के कारण परस्पर विचार, भावना, संदेश आदि को अभिव्यक्त करने के लिए मनुष्य भाषा का ही प्रयोग करता है।यह भाषा शायद चाहे संकेत भाषा हो अथवा व्यवस्थित ध्वनियों, शब्दों एवं वाक्य में प्रयुक्त कोई मानक भाषा हो।

भाषा के माध्यम से ही हम अपने भाव एवं विचार दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाते हैं तथा दूसरे व्यक्ति के भाव एवं विचार जान पाते हैं।

भाषा वह साधन है जिससे हम अपना इतिहास, संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान तथा अपनी महान परंपराओं को जान पाते हैं

संसार में संस्कृत, हिंदी , अंग्रेजी, बंगला, गुजराती, उर्दू , मराठी , तेलुगू , मलयालम , पंजाबी, उड़िया , जर्मन,  फ्रेंच इतालवी, चीनी जैसी अनेक भाषाएं हैं। भारत अनेक भाषाओं वाला देश है तथा अनेक बोली / उपभाषा और भाषाओं से मिलकर भारत राष्ट्र बना है।

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संस्कृत हमारी सभी भारतीय भाषाओं के सूत्रभाषा है तथा वर्तमान में हिंदी हमारी राजभाषा (राजकार्य भाषा) है।

किसी सभ्य समाज का आधार उसके विकसित भाषा को ही माना जाता है।हिंदी खड़ी बोली ने अपने शब्द भंडार का विकास दूसरी जनपदीय बोली और संस्कृत तथा अन्य समकालीन विदेशी भाषाओं के शब्द भंडार के मिश्रण से किया है किंतु हिंदी के व्याकरण के विविध रूप अपने ही रहे हैं।

हिंदी में अरबी फारसी, अंग्रेजी आदि विदेशी भाषाओं के शब्द भी प्रयोग के आधार पर तथा व्यवहार के आधार पर आकर समाहित हो गए हैं।

भाषा स्थाई नहीं होती उसमें दूसरी भाषा के लोगों के संपर्क में आने से परिवर्तन होते रहते हैं और भाषा में परिवर्तन धीरे-धीरे होता है और इन परिवर्तनों के कारण नई-नई भाषाएं बनती रहती है।

इसी कारण संस्कृत ,पालि ,प्राकृत ,अपभ्रंश आदि के क्रम में ही आज की हिंदी तथा राजस्थानी, गुजराती ,पंजाबी, हिंदी, बांग्ला, उड़िया, मराठी आदि अनेक भाषाओं का विकास हुआ है।

भाषा के भेद

जब हम आपस में बातचीत करते हैं तो मौखिक भाषा का प्रयोग करते है तथा पत्र लेखन, पुस्तक, समाचार पत्र आदि में लिखित भाषा का प्रयोग करते हैं। विचारों का संग्रह भी हम लिखित भाषा में ही करते हैं तो इस आधार पर भाषा के दो भेद होते हैं।

  1. मौखिक भाषा
  2. लिखित भाषा
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मौखिक भाषा

मुलत: सामान्य जनजीवन के बीच बातचीत में मौखिक भाषा का ही प्रयोग होता है और इसे प्रयत्न पूर्वक सीखने की आवश्यकता नहीं होती बल्कि जन्म के बाद बालक द्वारा परिवार व समाज के संपर्क तथा परस्पर संप्रेषण व्यवहार के कारण स्वाभाविक रूप से मौखिक भाषा सीख ली जाती है।

लिखित भाषा

लिखित भाषा की वर्तनी और उसी के अनुरूप उच्चारण प्रयत्न पूर्वक सीखना पड़ता है। मौखिक भाषा की ध्वनियों के लिए स्वतंत्र लिपि चिन्हों के द्वारा ही भाषा का निर्माण होता है।

भाषा और उपभाषा / बोली में अन्तर

एक सीमित क्षेत्र में बोले जाने वाले भाषा के स्थानीय रूप को “उपभाषा” कहा जाता है जिसे “बोली” भी कहते हैं। 

कहा गया है कि “कोस कोस पर पानी बदले , 5 कोस पर बानी“। हर 5-7 मील पर बोली में बदलाव आ जाता है।भाषा का सीमित,अविकसित तथा आम बोलचाल वाला रूप बोली कहलाता है जिसमें साहित्य रचना नहीं होती तथा जिसका व्याकरण नहीं होता व शब्दकोश भी नहीं होता है जबकि भाषा विस्तृत क्षेत्र में बोली जाती है उसका व्याकरण तथा शब्दकोश होता है तथा उसमें साहित्य लिखा जाता है।

किसी बोली का संरक्षण तथा अन्य कारणों से यदि क्षेत्र विस्तृत होने लगता है तथा उसमें साहित्य लिखा जाने लगता है तो वह भाषा बनने लगती है तथा उसका व्याकरण निश्चित होने लगता है।

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हिंदी की बोलियाँ

हिंदी केवल खड़ी बोली (मानक भाषा) का ही विकसित रूप नहीं है बल्कि जिसमें अन्य बोलियाँ भी समाहित है जिनमें खड़ी बोली भी शामिल है। यह निम्न प्रकार है-

  1. पूर्वी हिंदी जिसमें अवधी, बघेली तथा छत्तीसगढी शामिल है।
  2. पश्चिमी हिंदी में खड़ी बोली ,ब्रज, बाँगरु (हरियाणवीं) ,बुंदेली तथा कन्नौजी शामिल है।
  3. बिहारी की प्रमुख बोलियां मगही, मैथिली तथा भोजपुरी है। 
  4. राजस्थानी की मेवाड़ी, मारवाड़ी , मेवाती तथा हाड़ौती बोलियाँ शामिल है।
    •  कुछ विद्वान मालवी, ढूंढाड़ी तथा बागड़ी को भी राजस्थानी की अलग बोलियां मानते हैं।
  5. पहाड़ी की गढ़वाली , कुमाऊनी तथा मांदियाळी बोलियां हिंदी की बोलियाँ है।

इन बोलियो के मेल से बने हिंदी को संविधान सभा ने 14 सितंबर,1949 को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया। विभिन्न बोलियों के मेल से बनी हिंदी की भाषाई विविधता के कारण ही हिंदी के क्षेत्रीय उच्चारण में विविधता पाई जाती है।

तो दोस्तो आपको हिंदी व्याकरण का टॉपिक “भाषा किसे कहते हैं और भाषा कितने प्रकार की होती है? व उपभाषा या बोली क्या है?” की जानकारी कैसी लगी।हमे कमेंट करके बताये।

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में अपने शौक व लोगो की हेल्प करने के लिए Part Time ब्लॉग लिखने का काम करता हूँ और साथ मे अपनी पढ़ाई में Bed Student हूँ।मेरा नाम कविश जैन है और में सवाई माधोपुर (राजस्थान) के छोटे से कस्बे CKB में रहता हूँ।


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