मूल्यांकन क्या है? मूल्यांकन व मापन में अंतर, विशेषताएं व विधि

मनोविज्ञान की शिक्षण विधि में मूल्यांकन एक बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक है जिसमें से परीक्षा में काफी सारे क्वेश्चन आते हैं हम जानेंगे कि “मूल्यांकन क्या होता है?(What Is Evaluation In Hindi) मूल्यांकन और मापन में क्या अंतर है?(What Is The Differences Between Evaluation And Measurement),  मूल्यांकन के कितने प्रकार हैं? और मूल्यांकन की विधियां कौन-कौन सी है?”

मूल्यांकन ( Evaluation In Hindi)

मूल्यांकन क्या है? मूल्यांकन व मापन में अंतर, विशेषताएं व विधि
Evaluation in hindi – मूल्यांकन

मूल्यांकन दो शब्दों से मिलकर बना है।

मूल्य + अंकन = मूल्यों को अंकित करना 

यानि एक बालक के मूल्यांकन से अभिप्राय है उसके गुणों को देखना।

एक बालक विद्यालय वातावरण एवं सामाजिक वातावरण में रहते हुए जो अनुभव एवं प्रशिक्षण प्राप्त करता है, उसके माध्यम से जिन गुणों या मानवीय मूल्यों का विकास होता है ,उन्हें आंकलित करना ,उनकी व्याख्या करना, उनकी पहचान करना ही मूल्यांकन है।
जब किसी बालक के लिए उसके गुणों, विशेषताओं का मूल्यों के आधार पर किसी नवीन कार्य व्यवहार के लिए तय किया जाता है तो वह "निर्णय करना" कहलाता है।

➡️ मूल्यांकन शब्द का वास्तविक अभिप्राय निर्णय करना / निर्णय देना / निर्णय लेना होता है।

  1. शैक्षिक प्रक्रिया – वह जीवन पर्यंत चलने वाली प्रक्रिया जिसके द्वारा एक बालक निरंतर सीखता है।
  2. शैक्षणिक प्रक्रिया – वे सभी संसाधन जिनकी एक सुनियोजित व्यवस्था शिक्षा के लिए की जाती है।
  3. शिक्षण प्रक्रिया – वह कक्षा कक्षीय प्रक्रिया जिसके द्वारा एक बालक में निश्चित उद्देश्य पूर्ति की दिशा में शिक्षक द्वारा कार्य किया जाता है।
मूल्यांकन क्या है? मूल्यांकन व मापन में अंतर, विशेषताएं व विधि
मूल्यांकन प्रक्रिया
Note :- मूल्यांकन शैक्षिक प्रक्रिया का अंग होता है।

मूल्यांकन के द्वारा जब गुणों का आकलन हो जाता है तो फिर अभिव्यक्त करने के लिए मापन का सहयोग लेते हैं।

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मापन (Measurement In Hindi)

मूल्यांकन के द्वारा प्राप्त निष्कर्षों को प्रकट करने के लिए उन्हें संख्याओं में ढालना पड़ता है, इसे ही मापन कहते है।

मूल्यांकन क्या है? मूल्यांकन व मापन में अंतर, विशेषताएं व विधि

मापन मूल्यांकन का अंग है तथा यह मूल्यांकन के समापन को स्पष्ट करता है।

मूल्यांकन एवं मापन में अंतर ( Differences Between Evaluation And Measurement In Hindi)

S.Nमूल्यांकनमापन
1मूल्यांकन सतत प्रक्रिया है।मापन समय विशेष की प्रक्रिया है।
2मूल्यांकन बहुपक्षीय होता है।मापन एकपक्षीय होता है।
3मूल्यांकन व्यापक अवधारणा है।मापन एक संकुचित अवधारणा है।
4मूल्यांकन गुणात्मक व संख्यात्मक होता है।मापन मात्रात्मक अथवा संख्यात्मक होता है।
5मूल्यांकन परिवर्तनशील होता है।मापन अपरिवर्तनीय होता है।
6मूल्यांकन गुणों का आकलन करता है।मापन गुणों को मात्रात्मक रूप में प्रकट करता है।
7मूल्यांकन में वैधता, विश्वसनीयता, वस्तुनिष्ठता पाई जाती है।मापन में संभव नही है।
मूल्यांकन एवं मापन में अंतर

मूल्यांकन की विशेषताएं

किसी भी मूल्यांकन की श्रेष्ठता उसकी विशेषताओं से प्रकट होती है। महत्वपूर्ण विशेषताएं निम्न है।

वैधता

जब मूल्यांकन किया जाता है ,तब उसी विषय-वस्तु का मापन हो जिसके लिए मूल्यांकन का आयोजन हो रहा है तो यह आदर्श स्थिति मूल्यांकन की वैधता को दर्शाती है।

विश्वशनियता

मूल्यांकन के बाद प्राप्त परिणामों में अलग-अलग व्यक्तियों से जांच करवाने के बाद भी कोई परिवर्तन नजर नहीं आता है या परिणाम यथावत रहते हैं तो यह मूल्यांकन की विश्वसनीयता होती है।

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वस्तुनिष्ठता

ऐसा मूल्यांकन जिस पर किसी जाँचकर्ता/शिक्षक की रूचि, अभिरुचि या मनोवृत्ति का प्रभाव नहीं पड़ता हो तथा सभी के लिए एक समान परिणाम में निष्ठा हो।

व्यवहारिकता

जब मूल्यांकन में सफलता तथा कम परिश्रम में कम खर्चे के द्वारा किसी परिणाम को प्राप्त करने की क्षमता होती है तो वह मूल्यांकन अपने आप में सभी लोगों के लिए उपयोगी बन जाता है जो उसकी व्यवहारिकता को दर्शाता है।

उद्देश्यमूलकता

किसी भी मूल्यांकन में उसका कोई उद्देश्य निहित होता है, उस उद्देश्य की पूर्ति होना आवश्यक है। जैसे- एक बालक को आवश्यक सीमा तक अधिगम हुआ या नहीं, यह जानने के लिए किए गए मूल्यांकन में इसका पता लगना चाहिए।

विभेदकारिता

किसी भी मूल्यांकन के द्वारा के बालकों के वर्ग/ श्रेणी वार वर्गीकरण में आसानी हो जाती है तो वह उस मूल्यांकन की विभेदकारिता कहलाती है।

व्यापकता

जब मूल्यांकन में संपूर्ण विषय-वस्तु को समावेशित किया जाता है अथवा बालक विषयगत ज्ञान के अलावा सहशैक्षणिक उपलब्धि के व्यवहार को भी सम्मिलित किया जाता है तो यह मूल्यांकन की व्यापकता को दर्शाता है

नैदानिकता

मूल्यांकन के बाद जब एक बालक में कमी नजर आती है या फिर वह आवश्यक सीमा तक अधिगम नहीं कर पाता है, तो अधिगम नहीं कर पाने के कारणों का पता लगाना नैदानिक व्यवहार होता है जिससे कारण जानकर पुनःउपचारात्मक शिक्षण द्वारा बालको को आवश्यक अधिगम करवाया जा सकता है।

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सतत् प्रक्रिया

मूल्यांकन शैक्षिक प्रक्रिया का अंग है जो कि जीवन पर्यन्त चलने वाली सतत प्रक्रिया है, इसलिए मूल्यांकन भी सतत प्रक्रिया है।

सामाजिकता

मूल्यांकन के समय प्रतिभागी के सामाजिक वातावरण को ध्यान में रखते हुए मूल्यांकन को परिणामों तक ले जाना ही उसकी सामाजिकता को प्रकट करता है।

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में अपने शौक व लोगो की हेल्प करने के लिए Part Time ब्लॉग लिखने का काम करता हूँ और साथ मे अपनी पढ़ाई में Bed Student हूँ।मेरा नाम कविश जैन है और में सवाई माधोपुर (राजस्थान) के छोटे से कस्बे CKB में रहता हूँ।

   

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