ध्यान क्या है और कैसे करे? ध्यान करने के फायदे – Meditation In Hindi

Meditation for Fidgety Skeptics Book Summary In Hindi Write By Dan Harris, Jeff Warren and Carlye Adler – Meditation In Hindi

आज की दुनिया में काम का बोझ इतना ज्यादा है कि 10 साल के बच्चे भी अपने एक्ज़ाम्स को लेकर तनाव में रहते हैं। हर कोई आज की दुनिया में परेशान है और बहुत से लोग इससे छुटकारा पाने के लिए शराब या ड्रग्स का सहारा लेते हैं।

लेकिन क्या हो अगर तनाव से छुटकारा पाने का एक सुरक्षित तरीका हमारे पास हो जिसे बच्चे भी अपना सकते हों? क्या हो अगर हम किसी ऐसी आदत को अपनाएँ जो हमें हर हालात में खुश रख सके?

यह किताब हमें ऐसी ही एक आदत के बारे में बताती है। यह किताब हमें बताती है कि किस तरह से ध्यान करने से आप अपनी भावनाओं को पहले से ज्यादा अच्छे से समझ कर उन्हें काबू कर सकते हैं। यह किताब हमें (Meditation In Hindi) ध्यान करने के अलग अलग तरीके बताती है और साथ ही ध्यान को लेकर समाज के बदलते नजरिए के बारे में भी बताती है।

  • ध्यान क्या है?
  • ध्यान की शुरुआत कैसे करें?
  • ध्यान करने के क्या फायदे हैं।
  • ध्यान किस तरह से किया जाता है।
  • दुनिया क्यों अब ध्यान को अपना रही है।
ध्यान क्या है और कैसे करे? ध्यान करने के फायदे - Meditation In Hindi
ध्यान क्या है और कैसे करे? ध्यान करने के फायदे – Meditation In Hindi

आपके लिए ध्यान करने के फायदे (Benefits Of Doing Meditation In Hindi)

बहुत से लोगों का मानना है कि ध्यान करना पुराने जमाने की बातें हैं। लोग इसे ओल्ड फैशन मानते हैं। इस किताब के लेखक डैन हैरिस भी अब से कुछ साल पहले उन लोगों में से एक थे। लेकिन वक्त ने कुछ ऐसे मोड़ लिए कि उन्हें इस सच को मानना पड़ा कि ध्यान करने से वो काम हो सकते हैं जो दुनिया की कोई दवाई नहीं कर सकती।

डैन 2004 में एबीसी न्यूज़ के लिए एक एंकर का काम कर रहे थे। वे दुनिया भर से हो रहे युद्ध की खबरों को अपने चैनल के लिए लेकर आते थे। युद्ध में हो रही तबाहियां उन से सही नहीं जा रही थी और हर दिन उनका तनाव बढ़ता जा रहा था। एक दिन जब वे 50 लाख लोगों के सामने बोल रहे थे तभी बीच में उनकी आवाज़ फँसने लगी। 

उनका तनाव इतना ज्यादा बढ़ गया था कि वे बोल ही नहीं पा रहे थे। यह वो वक्त था जब डैन ने सोचा कि कुछ नया करने का वक्त आ गया है।

शुरुआत में डैन को लगा कि क्योंकि वे बहुत व्यस्त व्यक्ति हैं, उन्हें तनाव होना आम बात है। लेकिन यह समस्या उससे बढ़कर थी। हर सुबह वे अपने बेड से उठ नहीं पाते थे और उन्हें हमेशा लगता था कि उन्हें बुखार है। उन्होंने खुद को ठीक करने के लिए कोकेन का सहारा लिया, लेकिन वो काम नहीं आया।

डैन को इनके बाद ध्यान के बारे में पता लगा और वे उस पर कुछ लीसल्च करने लगे, वे यह जान कर हैरान हो गए कि ध्यान करने से वाकई तनाव कम होता है और यह बात साइंस ने साबित भी की है। इससे ब्लड प्रेशर कम हो सकता है, बेचैनी कम होती है और साथ ही डिप्रेशन के लक्षण भी कम हो जाते हैं। 

सिर्फ इतना ही नहीं, इनसे हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत हो जाता है और हमारे दिमाग के न्यूरॉन फिर से अरेंज होते हैं जिससे हम खुद को पहले से बेहतर तरीके से समझ पाते हैं और दूसरों से भी सहानुभूति दिखा पाते हैं।

ध्यान कैसे करे? (How To Do Meditation In Hindi)

अब हम जान गए हैं कि ध्यान करने के फायदे क्या हैं। आइए देखते हैं कि ध्यान करते कैसे हैं।

सबसे पहले आप किसी ऐसी जगह पर बैठिए जहाँ आप आराम महसूस करते हों। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप अपनी कुर्सी पर बैठे हैं या जमीन पर, बस शर्त यह होनी चाहिए कि वहाँ पर आप आराम महसूस कर रहे हों। आप सीधे बैठिए ना कि झुककर ।

इसे करने से पहले सबसे पहले यह सोचना छोड़ दीजिए कि यहाँ पर कुछ अच्छा या बुरा है। तो अगर कोई आपके ध्यान करते वक्त आपको आकर परेशान करता है तो उस पर गुस्सा मत हो जाइए, क्योंकि यहां पर कुछ भी अच्छा या बुरा नहीं है। 

इसके बाद आप अपने अंदर से हर उस भावना को निकाल दीजिए जिससे आपको परेशानी होती हो, अब चाहे वो किसी से नफरत हो, किसी बात पर गुस्सा हो या फिर किसी से प्रतियोगिता की भावना क्योंकि यह सारी भावनाएं हमारा सुकून हम से छीन लेती हैं।

शुरुआत में आप सिर्फ 5 या 10 मिनट तक ध्यान कर सकते हैं और समय के साथ अगर आप चाहें तो इसे बढ़ा सकते हैं। अब जब आप हर तरह की अच्छी और बुरी भावना को पीछे छोड़ आए हैं, आप ध्यान लगाने के लिए किसी भी एक चीज़ को चुन लीजिए। आप चाहें तो अपनी साँस पर ध्यान लगा सकते हैं कि वो किस तरह से आपके अंदर जा कर पके फेफड़ों में और पेट में फैल रही है या फिर आप अपने सामने रखी मोमबत्ती पर ध्यान लगा सकते हैं। 

आप यह देखिए कि लौ किस तरह से हवा के चलने पर हिल रही है या उसका रंग कितना चमकीला है। आप चाहें तो किसी भी चीज़ के ऊपर ध्यान लगा सकते हैं लेकिन एक बार आप ने अपना ध्यान उस पर लगा लिया तो हटाइए मत।

हो सकता है कि इस बीच आपके मन में कुछ बातें ने लगें जो कि आपका ध्यान भटकाएँ। यह होना आम बात है। आप इस पर से ध्यान हटा कर फिर से अपना ध्यान उस पर लगाइए जिस पर आप लगा रहे थे।

ध्यान की शुरुआत कैसे करें?

बहुत से लोगों का कहना होता है कि वे बहुत व्यस्त चलते हैं और उन्हें ध्यान करने का समय ही नहीं मिलता। लेकिन यह सब बहाने है ध्यान ना करने के। आपके पास कोई तो ऐसा समय होता होगा जब आप कुछ नहीं कर रहे होंगे। हो सकता है सुबह ब्रश करने के बाद आप अपना मोबाइल इस्तेमाल करते हों या शाम को काम से आने के बाद आप टीवी देखते हों। उस समय को बचा कर आप ध्यान में लगाइए।

जरूरी नहीं है कि ध्यान करने के लिए आपको एक माहौल की जरूरत हो। आप चाहें तो अपने आफिस में बैठकर भी ध्यान कर सकते हैं। जब भी आपको लगे कि अब तनाव में जा रहे हैं तो कुछ देर अपने काम से दिमाग हटाकर अपनी साँसों पर ध्यान लगाइए। सिर्फ एक मिनट तक करने ने भी आप पाएंगे कि आपका तनाव काफी हद तक कम हो गया है।

बहुत से लोग सिर्फ 10 साँस तक ध्यान लगाते हैं। अगर आप वाकई बहुत व्यस्त हैं और सुबह सो कर उठने से लेकर रात तक आपके एक बार एक मिनट का भी समय नहीं मिलता तो आप सिर्फ 10 साँस तक ध्यान लगाइए। आप अपनी आँखें बंद कर के 10 साँस अंदर और बाहर लीजिए और फिर अपने काम पर वापस जाइए।

आपका मकसद यह होना चाहिए कि आप ध्यान करने को एक आदत बना लीजिए। यह बहुत जरूरी है कि आप इसे हर दिन करें, वरना आपको इसके फायदे नहीं मिलेंगे। 

शुरुआत में आपको यह लगता होगा कि आपको ध्यान करना है, लेकिन बाद में आपको यह लगना चाहिए कि आपको ध्यान करना पसंद है। जब आपको वाकई लगने लगेगा कि आप इसे पसंद करने लगे हैं तो आपको यह बोझ नहीं लगेगा।

शुरुआत में आपको 10 मिनट तक बैठे रहना उबाऊ लग सकता है। इसलिए आप इसे सिर्फ 5 मिनट या सिर्फ 1 मिनट तक के लिए कीजिए। एक महीने के बाद 10 मिनट तक आसानी से ध्यान कर सकेंगे।

समाज के प्रसिद्ध लोग (Role Model) भी अब ध्यान को अपना रहे है

बहुत से लोगों को लगता है कि ध्यान करना बहुत पुराना फैशन है। वे सोचते हैं कि अगर वे ध्यान करने लगेंगे तो उनके परिवार वाले या उनके दोस्त उनके बारे में क्या कहेंगे। लेकिन शायद आपको ना पता हो, समाज अब ध्यान करने को अपना रहा है। सिर्फ समाज ही नहीं, बल्कि सरकार भी अब ध्यान करने पर अपना जोर दे रही है।

अगर हम भारत की बात करें तो बाबा रामदेव बहुत पहले से ही लोगों को ध्यान और योगा करने की सलाह देते आए हैं। पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक फिटनेस सीक्रेट नाम की लहर चली थी जिसमें भारत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, विराट कोहली, ह्रितिक रोशन और ना जाने कितने लोगों ने अपनी सेहत के राज को सोशल मीडिया पर शेयर किया था। बहुत से लोगों ने बताया कि वे इतने फिट इसलिए हैं क्योंकि वे ध्यान और योगा करते हैं।

सिर्फ भारत ही नहीं, विदेशों में भी बहुत से लोग अब इस बात को मानने लगे हैं कि ध्यान करने से फायदे होते हैं। वाशिंगटन कैपिटल हिल के कांग्रेसमैन टिम रेयान ने एक किताब लिखी थी – अ माइंडफुल नेशन। यह किताब हमें बताती है कि किस तरह से ध्यान करना सिर्फ लोगों के लिए ही नहीं बल्कि देश के लिए भी एक अच्छी बात हो सकती है। उन्होंने बताया कि अगर हर कोई ध्यान करे तो हम शिक्षा, सेहत और मिलिट्री को लेकर अच्छे नियम बना सकते हैं।

रेयान ने ओहियो के एक स्कूल में ध्यान करने को एक सब्जेक्ट बना दिया है। हालांकि बहुत से लोगों ने उनका विरोध किया, लेकिन उनके पास सारा डाटा था कि किस तरह से बहुत से लोगों ने ध्यान किया और इससे उन्हें फायदा हुआ।

ध्यान करने का मतलब यह नहीं है कि आप खुद को किसी धर्म से जोड़ रहे हैं। इसका मतलब यह है कि आप एक सेहतमंद जिन्दगी की तरफ कदम उठा रहे हैं। 

यह एक तरीका है जिससे हम अपना तनाव कम कर सकते हैं। दुनिया के महान लोग जैसे स्टीव जाब्स भी ध्यान करते थे और उनकी कामयाबी के बारे में बताने की जरूरत नहीं है।

बिना दबाव लंबे समय तक ध्यान कैसे करे?

अब तक हमने देखा कि किस तरह आप सिर्फ कुछ मिनट तक ध्यान कर के भी बहुत सारे फायदे पा सकते हैं। इस सबक में हम लम्बे समय तक ध्यान करना सीखेंगे। इस तरह का ध्यान लगभग 2 घंटे तक चल सकता है, लेकिन अगर आप चाहें तो इसे अपने हिसाब से छोटा या बड़ा कर सकते हैं।

क्योंकि इसे आपको 2 घंटे करना है, इसलिए यह ध्यान बैठकर नहीं, बल्कि लेटकर किया जाता है। इसे करने का सिर्फ एक नियम है, अपने अंदर खुद को किसी भी तरह से प्रेशर में डालिए। जो भी भावना आपके अंदर आती है उसे महसूस कीजिए और फिर से अपना ध्यान उस पर लगाइए जिसपर आप लगा रहे थे।

आप चाहें तो गाना बजा सकते हैं। आप अपने बेड पर या अपने काउच पर लेट जाइए और गहरी साँस लीजिए। आप यह सोचिए कि आप कहीं डूब रहे हैं और गहराई में जा रहे हैं। आप यह सोचिए कि आप हर तरह की चिंता को सतह पर छोड़कर अंदर जा रहे हैं। अगर आपके अंदर कोई भावना आती भी है तो उसे हटा कर फिर से अपना ध्यान लगाइए।

अगर आप इस ध्यान को अपने पार्टनर के साथ करेंगे तो आप उसके और अपने रिश्ते को सुधार हैं। आप अपने पार्टनर का हाथ पकड़ कर लेट जाइए और उसके शरीर में होने वाली हर हरकत को महसूस करने की कोशिश कीजिए। उसकी साँसों से हो रही हरकत या उनकी धड़कनों से हो रही हरकत को महसूस कीजिए।

इस तरीके से ध्यान कर के आप उसके लिए सहानुभूति को बढ़ा सकते हैं। अगर आपके अंदर अपने पार्टनर को लेकर कोई भावना आती है तो खुद को बताइए कि आपको कैसा लग रहा है और फिर उसे हटा कर अपना ध्यान लगाइए। 

वैसे तो आपको इसे 2 घंटे तक करना चाहिए, लेकिन जैसा कि हम ने कहा कि इसे करने का सिर्फ एक नियम है कि आप खुदपर प्रेशर मत बनाइए। अगर आपको अच्छा लग रहा है तो इसे और लम्बे समय तक कीजिए, वरना कम समय तक ही कीजिए।

ध्यान करने के फायदे

ध्यान करके आप कई प्रकार के फायदे पा सकते है और जीवन को अपने वर्तमान से कई गुना बेहतर बना सकते है।

ध्यान कर के आप अपनी भावनाओं पर काबू पा सकते हैं।

क्या आपके अंदर कभी कभी कुछ इस तरह की भावनाएं आती हैं कि आप चाह कर भी उन्हें काबू नहीं कर पाते? कभी कभी जब हमारा किसी से झगड़ा हो जाता है तो हम रात भर परेशान रहते हैं । कभी कभी जब हमें गुस्सा आता है तो हम ना चाहते हुए भी वो काम करते हैं जिसका हमें बाद में पछतावा होता है।

ध्यान करने का मतलब है अपनी भावनाओं को अपनाना, ना कि उन से दूर भागना। ध्यान करने से आप अपनी भावनाओं को अच्छे से समझ कर यह उन्हें काबू करना सीख सकते हैं।

ध्यान करने वक्त अगर आपके अंदर कुछ इस तरह की भावना आती है जो कि नेगेटिव है तो आप उसे दबाइए मत और ना ही उससे दूर भागिए। बल्कि उसे अपनाइए। आप ऐसा दिए गए चार स्टेप्स में कर सकते हैं

सबसे पहले अगर ध्यान करते वक्त आपके अंदर कोई भावना आती है तो उसे पहचानिए। यह देखिए कि उस भावना के आने पर आपके अंदर कौन सी हरकतें होती हैं। क्या आपकी साँसें तेज हो जाती हैं? क्या आपका माथा सिकुड़ जाता है? हर उस हरकत को पहचानिए जो उस भावना की वजह से आपके अंदर पैदा हुई।

इसे बाद आप उस भावना को अपनाइए। आप यह देखिए कि उसे आने पर आपको कैसा लगता है।

तीसरे स्टेप में आप यह पता करने की कोशिश कीजिए कि वो भावना आपके अंदर क्यों आ रही है। क्या यह किसी काम को ना करने का पछतावा है? क्या यह हार जाने का दुख है? उस वजह को खोजिए जिसकी वजह से यह भावना आपके अंदर आई। इस तरह से आप उसे आसानी से खत्म कर पाएंगे।

अंत में आप यह मान लीजिए कि वो भावना आपके अंदर है। आप यह सोचिए हर किसी के अंदर कुछ अच्छी और बुरी भावनाएं होती हैं। फर्क इससे पड़ता है कि आप किस तरह से उस भावना को संभालते हैं। उस भावना को खुद पर हावी मत होने दीजिए।

यह सारे काम कर पाना शुरू में मुश्किल हो सकता है लेकिन समय के साथ आपको इन्हें करने में कोई परेशानी नहीं होगी।

ध्यान करने से आप अपने काम में खुद को बेहतर बना सकते हैं।

कुछ लोगों के काम में बहुत ज्यादा प्रेशर होता है। उन लोगों सो हम गलती करने की उम्मीद नहीं कर सकते। इसलिए उन लोगों को बहुत संभाल कर सही से काम करना होता है और वो भी दिए गए समय के अंदर। एक्ज़ाम्पल को लिए डाक्टर, पुलिस और फायरमेन । 

डाक्टर को भगवान के बराबर माना जाता है और अगर उससे गलती हो जाएगी तो ना जाने क्या हो जाएगा। इस तरह के काम करने वाले लोग ध्यान को अपना कर अपने तनाव को कम कर सकते हैं और अपने काम में खुद को बेहतर बना सकते हैं।

कैलिफोर्निया के एल सेरीतो शहर की मेयर सिल्विया मोइर ने अपने सारे पुलिस वालों की टीम से कहा कि वे ध्यान किया करें। उन्होंने उन सभी लोगों को बताया कि किस तरह सघ ध्यान करने से वे भयंकर घटनाओं से दिमाग पर पड़े असर को कम कर सकते हैं। कुछ पुलिस वाले शुरुआत में मना कर रहे थे लेकिन जब फायदे सामने आने लगे तो उन्होंने ने भी इसे अपना लिया।

अगर डाटा की मानें तो रह बात सामने आई है कि पुलिस में या मिलिट्री में जो लोग ध्यान करते हैं उनकी छोटे समय तक की याद्दश तेज रहती है, वे खुद को मुश्किल वक्त से जल्दी बाहर निकाल लेते हैं, वे ज्यादा समय तक काम कर पाते हैं और उनके अंदर तनाव के हार्मोन कम पाए जाते हैं ।

एल सेरीतो के पुलिस वाले अपने तनाव को कम करने के लिए एक खास तरह का तरीका इस्तेमाल करते हैं जिसके चार स्टेप्स हैं। इसका इस्तेमाल कर के पुलिस वाले अपने तनाव और गुस्से को कम करते हैं ताकि वे कुछ ऐसा काम न कर बैठें जिससे बाद में उन्हें पछताना पड़े।

इसके लिए सबसे पहले रुकिए। अगर कोई व्यक्ति आप के ऊपर चिल्ला रहा है तो उसके ऊपर चिल्लाने से पहले गहरी साँस लीजिए और रुकिए। इसके बाद समझने की कोशिश कीजिए। यह देखिए कि आपके अंदर किस तरह की भावना पैदा हे रही है और वो आप से क्या करने को बोल रही है। अगर आपको गुस्सा आ रहा है और आपका मन कर रहा है कि आप सामने वाले को मार दें तो इस भावना को काबू कीजिए।

अंत में आप यह महसूस कीजिए कि आप आजाद हैं। आपका दिमाग आपको काबू नहीं कर रहा है और आप ही वो हैं जो वो सब कुछ कर सकते हैं जो आप करना चाहते हैं।

ध्यान करने को एक आदत बनाइए और इसके होने वाले फायदे को पहचाने।

अगर आप ने यह किताब अब तक पढ़ी है तो आपको लग रहा होगा कि – ध्यान करना वाकई एक बहुत अच्छी आदत हो सकती है और इससे मेरी जिन्दगी पहले से काफी अच्छी बन जाएगी। हालांकि यह बात सच है लेकिन यहाँ पर आपको एक बात समझ लेनी चाहिए कि कामयाब होना तो आसान है, पर कामयाब रहना मुश्किल। किसी आदत को अपनाना आसान काम है पर उसे बनाए रखना मुश्किल।

इसलिए अगर आप आज से ध्यान करना शुरू कर रहे हैं तो चाहे आप छुट्टी पर हों या बीमार हों, आप इसे हर दिन कीजिए। क्योंकि अगर आप ने इसे एक दिन के लिए छोड़ा तो आप इसे अगले दिन भी छोड़ देंगे और समय के साथ यह आदत आपके हाथ से निकल जाएगी।

ऐसा करने के लिए सबसे पहले इससे होने वाले फायदे को समझिए। आप यह देखिए कि ध्यान करने से पहले आपकी जिन्दगी कैसी थी और अब आपकी जिन्दगी कैसी है। एक बार आपको लगने लगेगा कि आपको वाकई इससे बहुत फायदा हुआ है तो आप उस फायदे को पाने के लिए हर रोज इसे करेंगे और यह आदत कभी नहीं जाएगी।

अगर आप काफी समय ध्यान कर रहे हैं तो आप कुछ ऊपर के लेवल के ध्यान करने की कोशिश कर सकते हैं जिनके फायदे भी बहुत ज्यादा होते हैं। आप अब तक अपनी साँस पर या किसी चीज़ पर ध्यान लगाते आए हैं, लेकिन अब आप कोशिश कीजिए कि आप किसी चीज़ पर ध्यान ना लगाएँ।

ऐसा कर पाना शुरुआत में मुश्किल हो सकता है लेकिन समय के साथ जब आपको इसकी आदत पड़ जाएगी तो आप यह देखेंगे कि आपको पहले से ज्यादा फायदा हो रहा है। हालांकि एक ही साथ कुछ ना सोचना और कुछ ना करना थोड़ा उबाऊ हो सकता है और यह भी हो सकता है कि आपके अंदर अलग अलग तरह के खयाल आने लगें, लेकिन आप अपना ध्यान वहाँ से हटा कर फिर से कुछ नहीं पर लगाइए।

फिर से, ध्यान में कुछ भी अच्छा या बुरा नहीं होता। आप बस अपने अंदर की हर एक भावना को अपनाते जाइए क्योंकि वो आपका एक हिस्सा है। उसे अपना लेने से आप उसे अच्छे से काबू कर पाएंगे।

Conclusion About Mediation In Hindi

ध्यान करना से आप अपने तनाव को कम कर के एक खुशहाल जिन्दगी जी सकते हैं। आज समाज इससे होने वाले फायदे को पहचान रहा है और इसे अपना रहा है। इसे करने के लिए आप कोई भी जगह चुन सकते हैं और आप चाहे तो इसे कितनी भी देर तक अपनी सुविधा के हिसाब से कर सकते हैं। इसे करने से आप अपनी भावनाओं को अच्छे से काबू कर के दूसरों की भावनाओं को समझ सकते हैं।

किसी खास व्यक्ति का ध्यान (Mediation In Hindi) कर के अपनी सहानुभूति को बढ़ाइए ध्यान करने से सिर्फ आप खुश ही नहीं रह सकते, बल्कि आप अपनी सहानुभूति को बढ़ा सकते हैं। उस व्यक्ति के बारे में सोचिए जिसे इस वक्त प्यार या सहारे की जरूरत है और फिर उस व्यक्ति के प्रति अपनी भावनाओं के बारे में सोचिए। अगर आप यह काम हर रोज करेंगे तो आप यह पाएंगे कि आप पहले से ज्यादा सहानुभूति से भरगए हैं।


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