सीखने के प्रतिफल Learning Outcomes In Hindi

मनोविज्ञान में सीखने का प्रतिफल (Learning Outcomes In Hindi) एक महत्वपूर्ण विषय है जो छात्रों को अधिगम के बाद उसके आउटकम के रूप में नतीजो पर ध्यान देता है।

सीखने का प्रतिफल को Reet व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी पूछा जाता है तो इसे अच्छे से समझे।

आज इस आर्टिकल में हम “सीखने के प्रतिफल क्या है? अर्थ ,आवश्यकता ,उद्देश्य व विशेषताएं ” के बारे में विस्तार से जानेंगे।

सीखने के प्रतिफल (Learning Outcomes In Hindi)

सीखने का प्रतिफल Learning Outcomes In Hindi
Learning Outcomes In Hindi
सीखा हुआ कोई भी ज्ञान बालक में स्थायी हो जाता है, अधिगम कहलाता है।
जब सीखे हुए ज्ञान का बालक आगे की परिस्थिति में उपयोग कर लेता है तो यह अधिगम है।

2017 में NCERT ने एक सर्वे के माध्यम से यह निष्कर्ष प्राप्त किया कि शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का आखिर प्रतिफल क्या निकला है? यह भी सुनिश्चित रूप से पता होना ही चाहिए।

इसको ध्यान में रखते हुए कक्षा 1 से ही सीखने के प्रतिफल का ब्यौरा तैयार किया गया और प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के लिए उसे व्यस्थित किया

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सीखने का प्रतिफल क्या है? (What Is Learning Outcomes In Hindi)

प्रत्येक बालक अलग-अलग प्रकार से सीखता है एवं सीखने के बाद वह किस नतीजे पर या परिणाम तक पहुंचता है, इसको जानने के लिए जो मापदण्ड कक्षावार / विषयवार तय किये जाते हैं, उनकी प्राप्ति को ही अधिगम / सीखने के प्रतिफल के रूप में जानते हैं।

सीखने का प्रतिफल के सन्दर्भ में जो विचार दिये गये हैं उनमें तय किया गया है, कि प्रत्येक बालक आगे की कक्षा में निरंतरता के साथ नवीन ज्ञान प्राप्त करें तथा उसे किस सीमा तक जानकारी हो, प्रतिफल के संदर्भ में उसके अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक एवं अन्य को जानने की जरूरत महसूस की गई है तथा उसी के लिए कक्षावार वर्गीकरण किया गया है।

  • सीखने के लिए लक्ष्य / उद्देश्य निर्धारण – शिक्षक केन्द्रित
  • सीखने के प्रतिफल – बाल केन्द्रित

सीखने के प्रतिफल एक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से ही वास्तविक निष्कर्ष प्राप्त किया जाना संभव है।

सीखने के प्रतिफल की आवश्यकता (Need Of Learning Outcomes In Hindi)

  1. RTE2009 में ये तय किया गया था कि 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बालकों को निः शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा दी जावे। [ पहली से 8वीं तक की शिक्षा ]
  2. बालक को उसके आयु स्तर के अनुसार शिक्षा दी जाये। जैसे – 6 वर्ष – पहली, 7 वर्ष – दूसरी क्लास, इसी क्रम में आगे की शिक्षा।
  3. बालकों में स्तरानुसार कौशल विकास एवं गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए । 
  4. शैक्षिक उद्देश्यों की प्राप्ति की जांच। 
  5. राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षिक आकांक्षाओं की प्राप्ति के लिए कार्यों का क्रियान्वन। 
  6. राज्य को शैक्षिक दृष्टिकोण से राष्ट्रीय स्तर पर विकसित करना।
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सीखने के प्रतिफल के उद्देश्य (Learning Outcome Objectives in Hindi)

  1. RTE-2009 के अनुसार 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बालकों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की प्राप्ति।
  2. शिक्षाशास्त्र, विषय की प्रकृति, विशेषताएँ एवं सीखने के प्रतिफल में समन्वय बैठाना।
  3. सीखने की निरन्तरता एवं सीखने के प्रतिफल यानि प्रगति के स्तर के लिए मापन हेतु कुछ मापदण्ड तय करना
  4. शिक्षण की प्रक्रिया में सुधार के लिए
  5. विषय वस्तु को बाह्य वातावरण से जोड़ना।
  6. अभिभावक को जागरू‌क बनाने के लिए।

सीखने के प्रतिफल की विशेषताएँ ( characteristics of learning outcomes in hindi)

  • विषयवार टिप्पणी का होना।
  • पाठ्‌मचर्या की अपेक्षाएँ (अभिप्राय है क्या परिवर्तन होने चाहिए)।
  • दीर्घकालीक लक्ष्‌यों का ज्ञान करवाना।
  • कक्षावार प्रतिफल को परिभाषित करना।
  • सीखने के प्रतिफल विषय आधारित होने के साथ ही प्रक्रिया आधारित हैं।
  • सीखने के प्रतिफल एक प्रकार से जाँच बिन्दु होते हैं जिनसे मात्रात्मक एवं गुणात्मक परिवर्तन पहचाने जाते हैं।
  • सीखने के प्रतिफल है उन बिन्दुओं से की गई जाँच सम्पूर्ण विकास के लिए आवश्यक है।
  • सीखने के प्रतिफल शिक्षक में बालक की उपलब्धि क्या हो? कि समझ पैदा करते हैं, जिससे शिक्षण अधिगम प्रक्रिया स्पष्ट होती है।
  • शिक्षकों को चाहिए कि उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए अधिगम प्रक्रियासों को स्थानीय संदर्भ में पूर्णता तक करें।
  • स्पाईरल पाठ्यचर्चा। (आकार का धीरे-2 आगे-आगे बड़ा होता जाना)
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में अपने शौक व लोगो की हेल्प करने के लिए Part Time ब्लॉग लिखने का काम करता हूँ और साथ मे अपनी पढ़ाई में Bed Student हूँ।मेरा नाम कविश जैन है और में सवाई माधोपुर (राजस्थान) के छोटे से कस्बे CKB में रहता हूँ।


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